Thursday, September 18, 2008

बुजुर्ग होना क्या पाप है !

नाम शबनम उमर होगी यही कोई ८५ साल वो चहेरे पर झुर्र्रिया उसकी उमर को और बखूभी दर्शा रही थी ! कानपुर के जरीब चौकी के पास एक हाते में वो रहती है उस दिन वहा मेरा अनायास ही जाना हो गया ! देखा की उस हाते के सभी लोग फिर वो चाहे बड़े हो या छोटे सब उसे घेरे खड़े थे ! मैं थोड़ा चौका की आख़िर ऐसा क्या है जो सब उस को घेर के खड़े है मैं भी उत्सुकतावश वहा खड़ा हो गया और सारा माज़रा देखने लगा वो लगातार हर व्यक्ति के सवालो का जवाब दे रही थी हर कोई उसे परेशां कर रहा था कोई उसे बहु का ताना दे रहा था तो कोई चोरी का इल्जाम उस पर लगा रहा था उस के चेहरे की भावः भंगिमा दर्शा रही थी की उससे पूछे जा रहे हर सवाल उसे परेशां कर रहे थे पर इन सबके बावजूद भी वो लगातार जिरह कर रही थी ! शायद उसे डर था की अगर वो उनके सवालो का जवाब नही देगी तो उसे वो वहा से निकल देंगे उसकी आँखों से लगातार आंसू गिर रहे थे लेकिन वहा पर किसी को इस बात से कोई फरक नही पड़ रहा था क्यों की वो उनके लिए महज़ मनोरंजन का साधन थी !
आधे घंटे तक ये सब कुछ चलता रहा जब लोगो को लगा की अब कुछ ज्यादा हो रहा है शबनम अब शायद ज्यादा परेशां हो रही है तो लोगो ने उसे कुछ देर तक के लिए छोड़ दिया मुझे लगा की अब शायद इस महिला को परेशां नही करेंगे लेकिन कुछ देर बाद फिर वही सब कुछ होने लगा जो पहले हो रहा था लेकिन इस बार परेशां करने की खुराक भी बढ़ गई थी एक छोटा सा बच्चा जिसकी उमर उस औरत की एक चौथाई होगी उसने परेशां करने की पहल की उसने उस हद तक परेशां किया जहा तक सोचा भी नही जा सकता है लोग उसकी आँखे बंद कर के उसे सर पर मार रहे थे कोई उसके दुपट्टे में आग लगा कर परेशां कर रहा था लेकिन किसी के दिल में दया नही आ रही थी शायद इस लिए क्यों की वो उनकी माँ थी !
मैंने वो मंजर देखा तो मैंने भगवान् से यही प्रार्थना की किसी को इतनी उमर मत दे और अगर दे तो ये सब परेशानिया मत दे फिर मैंने वहा पर उस महिला के बारे में पूरी जानकारी की तो पता लगा की वो एक विधवा है और उसकी बहु ने उसे घर से निकल दिया है लड़का है तो वो बहु की बात को ही मानता है उसे अपनी माँ से कोई मतलब नही है जिसकी वजह से वो ऐसे ही घुमती है और हर कोई उसे परेशां करता है मैंने जब उसपुछा की आप लोग मना क्यों नही करते है तो उनका सीधा जवाब था की जब उनके ख़ुद के लड़के बहु कुछ नही बोलते तो हम क्यों भाई लफडे में पड़े मैं उनके इस जवाब से बिल्कुल चौक गया फिर वो बोले यार जो चल रहा है चलने दो इसी बहाने कम से कम हम लोगो का मनोरंजन तो हो जाता है ये सब देख कर बस यही सोचता हू की भगवन उसे इस दुनिया से जल्दी अपने पास बुला ले ताकि अब उसे और दुःख न झेलने पड़े !

Saturday, May 17, 2008

सच या मेरा भ्रम !

main bhoot preto ya jinn aadi par vishwas nahi karta lekin इंसान के जीवन में कुछ घटनाये ऐसी घट जाती जिन्हें जीवन भर नही भुलाया जा सकता है मेरे साथ भी कुछ ऐसा हुआ जिसे मैं शायद मरते दम तक न भूल सकू ! मेरा फर्रुखाबाद ट्रान्सफर से पहले मैं कानपूर में रिपोर्टिंग करता था चूँकि मंडल होने के कारन आस पास के सारे जिले हमी लोगो को देखने होते थे जिस समय की ये घटना है उस समय हर चैनल में अजब गजब घटनाये दिखाने का बड़ा जोर चल रहा था दर्शको को बांधे रखने के लिए रोज ऑफिस से फ़ोन आते थे आज क्या भेज रहे हो कुछ ऐसा भेजो जिस से हमारी टी आर पी बढे और इसी उधेर्बुन में हम सब लगे रहते थे की ऐसा क्या भेजे जो दूसरो से हट कर हो मैं अपने ऑफिस में अपने कुलिग़ से इसी सम्बन्ध में बात कर रहा था की अचानक मेरे पास मेरे मित्र का फतेहपुर से फ़ोन आया हम बात चीत कर ही रहे थे की अन्यास मेरे मुँह से निकल गया की क्या तुम्हरे फतेहपुर में ऐसा कोई व्यक्ति है जो अजब गजब करिश्मे करता हो मेरी बात खत्म होती उस से पहले ही उसने मेरी बात को काटते हुए कहा की फतेहपुर का तो पता नही लेकिन यह से कोई ४० किलोमीटर एक गाव है विजय पुर वह पर एक व्यक्ति है जो अजीबो गरीब करिश्मे करता है मैंने उस से तुरंत पुरी जानकारी इकठा करने को कहा शायद उस दिन मेरी जबान पर सरस्वती विराजमान थी मैंने जो सोचा और जो कहा वो सब कुछ हो रहा था उसी दिन शाम को उसका फ़ोन आ गया और हम अगले दिन हम गाड़ी से फतेहपुर की ओर चल पड़े करीब २ घंटे में हम फतेहपुर पहुच गए वह से मैंने अपने दोस्त को लिया उसके साथ एक और व्यक्ति था मैं उस से परिचित नही था बाद में मुझे मेरे दोस्त ने बताया की ये विजय पुर गाव के प्रधान है और सारी जानकारी इन्ही से मैंने ली है मैंने बड़े उत्सुकता वश उनसे पूछा की जो आपने बताया है क्या वो सच है वो व्यक्ति बोला १०० % सच है मैं मन ही मन सोच रहा था की आज २१ वी सदी में भी कैसे कैसे अंधविश्वासी लोग पड़े है और खुश भी था अगर इसकी बात सच निकली तो मेरी तो लॉटरी निकल पड़ेगी और अगर झूठ निकली तो इसको अन्धविश्वास से जोड़ कर एक आधे घंटे का बढ़िया पैकेज तैयार हो जाएगा मैं इसी सोच में था की कब हम उस गाव पहुच गए पता ही नही चला हम सब गाड़ी से उतरे मैंने देखा वह दूर दूर तक कोई नही था मैंने उस प्रधान से पूछा यह तो मुझे कोई नही दिखाई दे रहा है कहा है वो दिव्या पुरूष टैब उसने बताया की यह से कोई ४ किलोमीटर की दूरी पर वो रहते है हम सब उनके पीछे हो लिए पतली पतली पग्दंदियो से होते हुए हम सब चले जारहे थे करीब ३ किलो मीटर चलने के बाद हमे एक मिठाई की दूकान नज़र आई चूँकि हम सब चल के थक चुके थे इस वजह से हम सब ने वह पर एक एक कप चाय और पानी पिया उसके बाद हम सब फिर अपनी मंजिल की ओर चल पड़े और आख़िर वो जगह आ ही गई जिसका मैं बड़ी बेसब्री से इन्तेजार कर रहा था मैंने वह देखा की एक झोपडी थी जिसके बाहर करीब १० -१२ लोग जमा थे हम उस प्रधान के साथ अंदर गए मैंने देखा वहा करीब ८० साल का एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठा था और उसके करीब एक लड़की खड़ी थी हम सब ने उसके चरण स्पर्श किए मैं इस सोच में था की ये तो वैसे ही मरी हुई हालत में है ये क्या करिश्मा करेगा मैं यही सोच रहा था की अचानक मेरा नाम पुकारते हुए कहा की कानपूर से ये आए है आपको टी वी पर दिखाना चाहते है येचाहते है की आप इन्हे कुछ करिश्मा कर के दिखाए मैं लगातार टकटकी लगाये उनको देख रहा था उन्होंने कुछ जवाब नही दिया अगले २ - ३ मिनट तक सन्नाटा फैल गया मैंने आंखो की भाषा से प्रधान को एक बार फिर कहने को कहा जब तक वो कुछ बोलता वो बुजुर्ग ख़ुद बोल पड़े मैं तो लोगो की तकलीफो को दूर करता हूँ खुदा की मुझ पर इतनी रहमत है जिसकी वजह से आपको लगता है की मैं कोई करिश्मा कर लेता हूँ आप अपनी परेशानी बताये मैं कोशिश करूंगा की उसको दूर कर सकू मैं तपाक से बोल पड़ा की बाबा बस इतनी समस्या है की हम बड़े दूर से इसी आस में आये थे की आप कर कोई चमत्कार देखेंगे लेकिन शायद हमारा आना व्यर्थ हो गया उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से मुस्कुराए और बोले क्या देखना चाहते हो मैंने कहा कुछ भी जो आप दिखा सके मैंने अपने कैमरामैन को इशारा किया की वो रेकॉर्डिंग को स्टार्ट रखे वो मुझसे बोले की तुम्हे मीठे में क्या पसंद है मैंने कहा गुलाबजामुन उन्होंने अन्दर से उस लड़की से एक खाली बर्तन मंगाया मैं लगातार उनकी गतिविधियो पर नज़र बनाया हुआ था उन्होंने उस खाली बर्तन को एक कपड़े से धक् दिया और आँख बंद कर के कुछ मंत्र बुदबुदाने लगे मैं बिना पलक जफ्काए लगातार उस बर्तन को देखे जा रहा था की अचानक कुछ देर बाद उस खाली बर्तन में रखा कपड़ा अपने आप उठने लगा मेरे रोंगटे खड़े हो गए मैं अपनी आंखो पर विश्वास नही कर पा रहा था की ये सब कैसे हो गया फिर उन्होंने मुझे गुलाबजामुन खाने को कहा मेरी हिम्मत नही पड़ रही थी की मैं उसको खा सकू दो तीन बार आग्रह करने के बाद मैंने भगवन का नाम लेकर गुलाबजामुन को खा लिया उसका स्वाद बिल्कुल वैसा ही था जैसा किसी मिठाई की दूकान में बनने वाले गुलाबजामुन का होता है मैं इस करिश्मे से बिल्कुल हथ्प्रभ था मैंने उसके बाद उनसे कैमरा में बात करने की गुजारिश की लेकिन उन्होंने मेरी बात को ताल दिया मैंने भी जोर नही दिया क्यों की मैं विसिउअल से संतूस्थ था हमने उनसे हाथ जोड़े और चलने की इजाजत मांगी हम जैसे ही बाहर निकलने लगे टैब उन्होंने कहा की आप जिस रास्ते से आये थे वह पर मिठाई की दुकान पर इन गुलाबजामुन की कीमत को अदा कर दीजियेगा मैं सोच सोच कर हैरान था की उस दुकान के गुलाबजामुन से इस घटना कर क्या सम्बन्ध खैर हम उस दुकान पर पहुचे हमने दुकानदार से कहा की आज गुलाबजामुन बनाये थे वो बोला हा आज ही सुबह बनाये थे मैंने पूछा कितने बोला यही कोई ५० पीस मैंने कहा गिनो जब उसने गिने तो उसमे सिर्फ़ ४० ही निकले मैंने कहा तुम तो ५० कह रहे थे वो बोला मुझे ख़ुद समझ में नही आ रहा है की बाकि के १० गुलाबजामुन कहा गए जब की सुबह से तो कोई बिक्री भी नही हुई है मैंने उसको उन दस गुलाबजामुन की कीमत अदा की और हम वापस कानपूर की ओर चल पड़े मैं रास्ते में सोचते हुए बड़ा प्रसन्न था की आज मुझे ऐसे ख़बर मिली है जिसका प्रसारण तहलका मचा देगा मैं ऑफिस पहुचते ही सबसे पहले कास्सेते को प्ले किया मेरे होश उड़ गए जब देखा उसमे मैंने की काउंटर टाइम तोह था लेकिन दृश्य कुछ भी नही थे मैंने अपने कैमरामैन से पूछा तो वो बोला वह पर तो सब रेकॉर्ड हो रहा था यह पता नही क्या हो गया मैं अब इस सोच में पढ़ गया था की मैं कैसे लोगो को यकीं दिलाऊंगा की मैं क्या करिश्मा दख कर आया हूँ अब मुझे यकीं हो गया था की वो वास्तव में कोई दिव्या पुरूष था उस घटना के एक महीने बाद मुझे एक स्टोरी के सिलसिले में फतेहपुर जाना पड़ा मैंने जब वह पता किया तो मुझे मालूम पड़ा की वो बाबा तो कोई १ महीना पहले ही इस जगह को त्याग कर जा चुके है यकीन मानिये मैं कई रातो तक इसी सोच में डूबा रहा की ये सच था या मेरा भ्रम या मैं कोई सपना देखा कर जागा हूँ लेकिन मैं इस बात को मान गया हूँ भले ही आज ज़माना २१ वी सदी में जा रहा है लेकिन हिन्दुस्तान में चमत्कार और चमत्कार करने वालो की कमी नही है !

अक्षत सक्सेना

Tuesday, May 6, 2008

प्यार का नया रंग..............................

कुछ दशक पहले एक गीत बड़ा चर्चित हुआ था " मैं तुझसे मिलने आई मन्दिर जाने के बहाने" ये गीत उस समय का है जब प्रेमी और प्रेमिकाए एक दुसरे से मिलने के लिए इसी तरह के बहाने का इस्तेमाल किया करते थे और बड़ी मुश्किल से लोगो से, घरवालो से नज़रे चुरा कर अपने प्यार की दास्तान को लिखते थे अपने प्यार का इज़हार करने के लिए लोग प्रेम पत्रों का ही इस्तेमाल करते थे कुछ इसमे कामयाब होते थे और कुछ को निराशा हाथ लगती थी लेकिन इन सब के बावजूद भी उस प्यार के रंग की बात ही कुछ और थी लेकिन अब ज़माना बदल चुका है अब चाहे प्रेमी हो प्रेमिकाए सब आधुनिकता के रंग में रंग चुके है प्यार के मायने बदल चुके है अब इस नए दौर के प्रेमी प्रेमिका एक दुसरे से मिलने के लिए मन्दिर जाने का बहाना नही करते बल्कि मन्दिर में ही मिलने में ज्यादा विश्वास रखते है इनका मानना है की मन्दिर से बढिया आपको दूसरी कोई जगह नही मिल सकती है क्यों की यह किसी भी प्रकार का खतरा नही है न पुलिस का खतरा , न घरवालो का खतरा , और न ही किसी समाजसेवी संघठन के कर्यकर्तायो का खतरा आप आराम से यहाँ पर अपने प्यार की की नई दास्तान को लिख सकते है शायद यही है आज के इस नए युग का प्यार बस मोबाइल से एस मेस एस कर के टाइम पक्का किया और साहब पहुच गए मन्दिर अब इस से सस्ती जगह कहा मिलेगी बस २० रुपये की एक पूजा की थाली लेनी है, और यही कही अगर दुसरे जगह मिलने को बुलाते तो लंबा खर्चा और दुनिया भर की परेशानी, और खुदा न खास्ता कभी किसी ने देख भी लिया तो कह देंगे मन्दिर दर्शन करने गए थे और इस तरह झंझट से मुक्ति भी मिल जायेगी , मुझे गाव, कसबो का तो नही पता लेकिन महानगरों में तो ये आज का फैशन हो चुका है आप किसी भी मन्दिर में जाकर देखे तो आप ख़ुद समझ जायेंगे ये प्रेमी प्रेमिकाए भगवन के दर्शन कम और एक दुसरे के दर्शन करने ज्यादा आए है मैं ये नही कहता की प्यार करना ग़लत है लेकिन आज के इस नए दौर के प्रेमी प्रेमिका कम से कम इस बात का तो ध्यान रखे,अपने सवेद्नाओ को काबू में रखे वो जिस जगह अपने प्यार की नाव को चला रहे है वो मन्दिर प्रांगन है जहा हर वर्ग का व्यक्ति सरोकार रखता है फिर वो चाहे बुजुर्ग हो बच्चे हो या फिर पुरूष , महिलाये आपके इस कृत्य से जहा आपकी साख पर धब्बा लग रहा है वही उस मन्दिर की लोकप्रियता भी धूमिल हो रही है मेरा तो बस इतना अनुरोध है उन सभी प्रेमी प्रेमिकाओ से की प्यार को नया रंग मत दो क्यों की अभी तो मन्दिर अपने भगवन के नाम से जाना जा रहा है और ये सिलसिला अगर ऐसे ही बद्दस्तूर जारी रहा तो कुछ दिनों बाद मन्दिर अपने भगवन के नाम से नही बल्कि "प्यार का मन्दिर" के नाम से जाना जाएगा और शायद हिंदुस्तान की संस्कृति पर ये सबसे बड़ी चोट होगी !

अक्षत सक्सेना

Sunday, March 16, 2008

त्यौहार हुए अब फीके !

कभी एक समय ऐसा होता था जब किसी भी त्यौहार का हम सबको बड़ी बेसब्री से इन्तेजार रहता था पर अब शायद ये सब एक महज़ ओप्चारिकता मात्र बन कर रह गया है शयद इसकी एक बड़ी वजह महंगाई है तो दूसरा एक दुसरे के लिए समय निकाल पाना आज हम सब इतने व्यस्त हो गए है की हम आज किसी भी त्यौहार को उस ढंग से नही मना पाते जिस तरह से कभी हम उन त्योहरो को मनाया करते थे चूँकि हम भारतीय है इस वजह से इतने संस्कार हम में है इस लिए थोड़ा बहुत हम इन त्योहरो को मना भी लेते है लेकिन अगर महंगाई पर लगाम नही कसी और आज के समाज का व्यक्ति इतना ही व्यस्त रहा तो शयद कुछ दिनों बाद ये सारे त्यौहार किसी पंचांग पर ही अच्छे लगेंगे अब आप इस बात से अंदाजा लगा लीजिये की अब कोई भी त्यौहार हो फिर वो चाहे होली हो या दीवाली महीने भर पहले से घरो में तैयेरीहोने लगती थी तरह तरह के पकवान बनते थे लोग एक दूसरो के यह मिलने जाया करते थे पर अब ये सब शायद ख़त्म सा हो गया है आज महंगाई तो दिन दूनी रात चौगनी तर्रकी कर रही है तो वही दूसरी तरफ़ अब शायद अपनों के लिए तो समय निकलना मुश्किल है किसी और के यह क्या मिलने जायेंगे अब छोटे सहरों में तो अब भी लोग इन त्योहरो को संजोये हुए है लेकिन बड़े महानगरों में तो अब इन त्योहरो को लोग बोझ सा समझने लगे है उनके हिसाब से तो अब त्यौहार महीने का बजट को बिगाड़ने के के लिए बनाये गए है अब अगर ये सिलसिला ऐसे ही बदस्तूर जारी रहा और महंगाई ने अपने कदम नही रोके तो शायद हम जो अभी थोड़ा बहुत किसी त्यौहार को जानते है ,भूल ही जायेंगे और जो कहते है की त्योहरो के बहाने हम अपनों से मिलते है ये सिलसिला भी शायद थम जाएगा !

Saturday, March 1, 2008

रियलिटी शो में उत्तर प्रदेश का योगदान !

कहते है की अगर आपके अन्दर लगन है और आप में प्रतिभा है तोआपको आपका मुक्कमल जहाँ मिल जाएगा लेकिन शायद उत्तर प्रदेश की प्रतिभाओ की किस्मत में ये दिन देखना लिखा नही है आज जिस तरह से हर टि वी चैनल में रियलिटी शो की एक बहार सी है उसमे हर प्रदेश के बच्चे भाग ले रहे है हमारा उत्तर प्रदेश भी इन सब में पीछे नही है हमारे यह से भी कई प्रतिभाय निकली और उन्होंने उत्तर प्रदेश का नाम भी रोशन किया लेकिन वो सभी प्रतिभाये अन्तिम मुकाबले में हार गई जी हां ये एक कड़वा सच है की उत्तर प्रदेश के जन मानस ने उन्हें सपोर्ट नही किया और इसे हमे स्वीकारना होगा अगर हम बात करे तलेंट हंटशो की तो इस समय सबसे ज्यादा प्रोग्राम सिंगिंग कांटेस्ट के हो रहे है जिसमे भारत के अलावा अन्य देशो के बच्चे भी शिरकत कर रहे है फिर वो जी पर आने वाला प्रोग्राम सा रे गा म पा हो या स्टार पर आने वाला प्रोग्राम वौइस् ऑफ़ इंडिया या सोनी पर आने वाला प्रोग्राम इंडियन आइडल हो सभी कांटेस्ट में हमारे उत्तर प्रदेश की प्रतिभाओ ने भाग लिया फाइनल तक का सफर भी तय किया लेकिन अंत में हुआ वही जिसकी उम्मीद थी हम हार गए क्यों की हमे दुसरे प्रदेश से तो वोट मिले लेकिन हमारे उत्तर प्रदेश से हमे उतने वोट नही मिले जितना हमने उम्मीद की थी ये पहली बार ऐसा नही हुआ है की कोई प्रतिभागी हारा है हर संगीत मुकाबले में उत्तर प्रदेश के प्रतिभागी को हार का स्वाद चखना पड़ा है फिर वो चाहे विनीत , पूनम यादव,हर्षित सक्सेना या अंकिता मिश्रा क्यों न हो ये सभी वो प्रतिभाये थी जो किसी भी मुकाबले को जितने का दम ख़म रखती थी लेकिन उत्तर प्रदेश का का सहयोग न मिल पाने के कारन आज ये प्रतिभाये अपना वजूद नही सथापित नही कर पाई आख़िर ऐसी क्या वजह है की उत्तर प्रदेश का जन मानस अपने प्रदेश की प्रतिभाओ को सहयोग नही प्रदान कर रहा है या फिर यहाँ का जनमानस कही ये तो सोचता की इस से हमारा क्या फायदा होगा शायद हा यही एक सबसे बड़ा कारन है जो यह की प्रतिभाये कही आगे नही बढ़ पा रही है अब आप इस बात से अंदाजा लगा लीजिये की सबसे ज्यादा प्रतिभाये उत्तर प्रदेश की राजधानी से यानी नवाबो के सहर से निकली लेकिन आखिर नवाबो ने अपना नवाबी अंदाज़ दिखा ही दिया और एक भी प्रतिभा अपने प्रदेश का नाम नही रोशन कर पायी देख कर बड़ा अचरज सा लगता है जब जब अन्य प्रदेश की प्रतिभाये अपने प्रदेश में जाती है तो वहा का हर नागरिक उनका स्वागत करने को उत्सुक सा रहता है उन्हें इस बात की खुसी होती है की उनके सहर का नाम उनके प्रदेश का नाम रोशन हो रहा है लेकिन वही हमारे उत्तर प्रदेश में ऐसा कुछ भी आपको नही मिलेगा शर्म आनी चाहिए यह के लोगो को जो अपने प्रदेश की प्रतिभाओ की क़द्र नही कर रहे है आज जब हर प्रदेश अपनी प्रतिभाओ को आगे लाने में सहयोग कर रहा है तो हम उत्तर प्रदेश के लोग क्यों किसी से पीछे रहे हमे भी अपनी प्रदेश की प्रतिभाओ की आगे से आके सहयोग करना चैहिये आज इस दौड़ में एक और नह्ना प्रतिभागी तन्मय चतुर्वेदी नवाबो के शहर से है जिसका भाग्य का फैसला होना है कही ऐसा न हो एक बार फिर उत्तर प्रदेश की उपेक्षा का शिकार ये प्रतिभागी हो जाए और एक और नया नाम उस फेरहिस्त में जुड़ जाए अगर ये सिलसिला ऐसे ही जारी रहा और लोगो की दिलो की दुरिया कम नही हुई तो आगे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की प्रतिभाये अपना वजूद शायद खो देंगी !

Thursday, February 28, 2008

छात्र हुए धार्मिक

कहते है की भगवान् की अगर सच्चे मन से पूजा की जाए तो वो सबकी सुनते है इसीलिए आप कभी गौर करे तो आपको फरबरी से लेकर मार्च के महीने में सबसे ज्यादा भक्त मिल जायेंगे, आपको हर धार्मिक स्थल पर छात्र-छात्राओ की भीड़ मिल जायेगी जो अपने अपने तरीके से भगवान् को प्रसन्न करने में लगे होंगे कोई अगर हनुमान जी की पूजा कर रहा होगा तो कोई दुर्गा जी को प्रसन्न करने में लगा होगा कोई मस्जिद में नमाज पढ़ रहा होगा तो कोई गुरूद्वारे में मत्था टेक रहा होगा आख़िर ये सब करे भी क्यों नही अब समय भी तो कितना कम रह गया है अरे भाई एक्साम जो आ गए है जी हां ये भीड़ कोई और वजह से नही मन्दिर या मस्जिद में दर्शन कर रही है इन छात्र -छात्राओ को आख़िर बढिया नम्बर से पास जो होना है, इसलिए इतना तो करना ही पड़ेगा न अब भले ही साल के दस महीने भगवन को याद न किया हो उस से क्या फर्क पड़ता है इन दो महीने में भगवन को मना लेंगे अब भले ही ये उस मन्दिर के बाहर से रोज निकलते हो और कभी श्रद्धा से सिर भी न झुकाया हो लेकिन फरबरी और मार्च के महीने में ये सब कुछ भूल कर सीधे भगवन की शरण में आ जाते है इतना ही नही कितने तो ऐसे है जो मन्दिर में ही कितने प्रण कर लेते है जैसे भगवन इस बार पास करा दो अगली बार ऐसा कुछ नही होगा हम मन लगा कर पढ़ाई करेंगे या भगवन इसबार पास करा दो हम मीट खाना छोड़ देंगे या किसी गरीब को कपड़े,रुपए वगैरह दान करेंगे इत्यादी ! जी हां इस समय ये छात्र -छात्र कम और पुजारी ज्यादा बन जाते है इनसे ज्यादा धार्मिक बात करने वाला आपको कोई और दूसरा नही मिलेगा अब जब साल भर इन्होहने ऐसे ही निकाल दिए तो भगवन से ही गुजारिश करनी होगी क्यों की अगर घर पर ये बात कही तो जाहिर सी बात है पापा या मम्मी के क्रोध से इन्हे कोई नही बचा सकता शायद इनका भगवन भी नही, क्यों की माँ बाप तो अपना पेट काट कर इनको किसी तरह पढ़ा रहे है और ये बरखुरदार है जो साल भर तो शादी,पार्टी में मशगूल रहे अब जब सिर पर बोझ आया तो सीधे भगवन की शरण में भागे इतनी भगवन के प्रति भक्ति फरबरी से लेकर मार्च के महीने में मेरे ख्याल से से सिर्फ़ भारत जैसे देश में होती होगी आख़िर इन सब की वजह क्या है क्यों छात्र साल भर मन लगा कर पढ़ाई नही करते क्यों उन्हें हर साल फरबरी मार्च में भगवन से अर्जी लगनी पड़ती है, ये एक बहुत बड़ी समस्या है जिसका हल खोजना बहुत जरूरी है क्यों की जिस तरह से अन्य देशो के बच्चे तेजी के साथ तरक्की कर रहे है हमारे भारत देश के बच्चो को भी उनसे आगे तरक्की करनी है और ये सब तभी सम्भव होगा जब इस देश के बच्चे मन लगा कर पढे क्यों की भगवन भी उन्ही का साथ देते है जो मन लगा कर पूरी तन्मयता के साथ पढ़ाई करते है इसलिए मैं उन अभिभावकों से कहना चाहता हूँ की उन्हें इस जानकारी से अवगत कराये और उनका सही मार्गदर्शन करे ताकि हमारे देश भारत के बच्चे जो कल का भविष्य है इस देश को और उज्जवल कर सके !

Sunday, February 24, 2008

परिवार का टूटना

आज के इस वर्तमान युग में महिलाओ को किसी भी प्रकार से कम नही आका जा सकता है आज वो बराबरी से पुरषों के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर काम कर रही है क्या वास्तव में महिलाओ के ऐसा करने से उनको वो बराबरी का दर्जा प्राप्त हो गया है? या कही ऐसा तो नही है इस सबके चक्कर में वो अपना नैतिक कर्तव्य भूल रही है ? अगर हम बात करे आजादी से कुछ सालो पहले की तो क्या तब भी ऐसा ही था या अगर हम बात करे राजा महाराजाओ के ज़माने की तो क्या तब भी महिलाये अपने अधिकारों को लेकर इतना सोचा करती थी शायद नही क्यों की उन्हें पता था की महिलाओ का काम घर से बाहर कम और घर के अन्दर ज्यादा था लेकिन शायद आज की परिकल्पना बदल चुकी है अब हर महिला चाहती है की उसको वही दर्जा प्राप्त हो जो पुरषों को मिल रहा है लेकिन इन सब के चक्कर में शायद वो अपना कर्तव्य भूल चुकी है अब वो घर से ज्यादा नौकरी को तवज्जो दे रही है शायद यही कारन है की आज ७० प्रतिशत से भी ज्यादा परिवार टूटने की कगार पर है आख़िर ऐसा क्या है जो आज महिलाये अपना सामंजस्य नही बैठाल पा रही है अब वो किसी भी तरह का समझोता नही करना चाहती है आख़िर ऐसा क्या कुछ इन सालो में हो गया की अब परिवार में एकता खत्म सी होती जा रही है शायद इसका सही जवाब तो कोई भी नही दे सकता है क्यों की अब ज़माना बिल्कुल बदल चुका है अब किसी भी छोटीसी बात पर सीधे तलाक की नौबत आ जाती है कोई भी झुकने को तैयार नही है फिर वो चाहे पुरूष हो या फिर महिला इनके इन सब करने से शायद ये अपनी ज़िंदगी तो ख़राब कर ही रहे है अपने संग संग अपने बच्चो का भविष्य भी ख़राब कर रहे है इन सब मुद्दों पर अगर चर्चा करे तो ये कहने में मुझे कोई गुर्हेज नही होगा की महिलाओ को अब अपनी जिम्मेदारी को समझ लेना चाहिए इन टि वी धारावाहिक से बाहर निकल कर ज़िंदगी जिए आज अगर इतना कुछ परिवारों के बीच दुरिया बड़ी है तो इसकी एक मुख्य वजह धारावाहिक का आम आदमी में घुलना भी है आज हर महिला चाहती है की वो नौकरी करे और आज़ादी से जिए वो अपने पैरो में खड़ी हो वो किसी के अहसान को न ले लेकिन इन सबके चक्कर में वो अपना परिवार क्यों छोड़ रही है नौकरी करना बुरी बात नही है पर नौकरी के साथ साथ वो अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी न्हीभाये ताकि एक खुशनुमा माहोल बन सके ये बात जितनी महिलाओ पर लागु होती है उतनी ही पुरषों पर भी लागू होनी चाहिए और शादी जैसे पवित्र बन्धन जिसे कहा जाता है की ये सात जन्मों का बंधन है ये इतनी जल्दी न टूटे क्यों की हमारा हिंदुस्तान अपनी संस्कृति में जितना प्रसिद्ध है उतना ही प्रसिद्ध शादियों को लेकर है कम से कम हिंदुस्तान की नई आवाम इस को जीवित रहने दे, पश्चिमी सभ्यता को छोड़ कर भारतीय संस्कृति में ढलने की कोशिश करे तभी कोई बदलाव आ सकता है वरना ये लगातार परिवारों का टूटना सबकी ज़िंदगी तबाह कर देगा और इन सबका का कारन कोई और नही हम और आप होंगे !